20110619

जन्मदिन पर राहुल गाँधी का भाषण: एक पूर्वानुमान

आज राहुल गाँधी का जन्मदिन है। पिछले साल ‘राहुल जन्मदिवस’ पूरे रूआब के साथ मना था। हमारे शहर वाराणसी में भी ‘केक’ कटे थे। अख़बार के कतरन बताते हैं कि 10-जनपथ पर जश्न का माहौल था। लेकिन इस साल स्थितियाँ पलटी मारी हुई दिख रही हैं। राहुल गाँधी मीडिया-पटल से लापता हैं। उन्हें जन्मदिन की बधाईयाँ देने वाले बेचैन हैं। आज के दिन यदि राहुल गाँधी जनता से मुखातिब हुए, तो वे क्या कुछ अपने भाषण में बोल सकते हैं? प्रस्तुत है एक पूर्वानुमान:

‘‘प्यारे देशवासियों, योगगुरु रामदेव अपने किए की सजा भुगत रहे हैं। उन जैसों का यही हश्र होना चाहिए। बाबा रामदेव की मंशा ग़लत थी। वह सत्याग्रह के नाम पर लोकतंत्र को बंधक बनाना चाहते थे। दिल्ली पुलिस ने समय रहते नहीं खदेड़ा होता, तो बाबा रामदेव संघ के साथ मिलीभगत कर पूरे कानून-तंत्र की धज्जियाँ उड़ाकर रख देते। संघ और भाजपा से उनके रिश्ते कैसे हैं? यह देश की जनता जान चुकी है। जनता जागरूक है। वह भारतीय राजनीतिज्ञों का नस-नस पहचानती है।

इस देश के लिए मेरी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने जान दिए हैं। मेरे पिता ने अपना बलिदान दिया है। मेरी माँ ने प्रधानमंत्री पद का लोभ नहीं किया। सिर्फ इसलिए कि वे जनता के लिए बनी हैं। कांग्रेस पार्टी अकेली ऐसी पार्टी है जो सही और गलत में भेद करना जानती है। कांग्रेस जैसी जनसेवी पार्टी को आज बुरा कहने वाले खुद कहाँ दूध के धुले हैं? लूटेरों और अपराधियों की पार्टी है बसपा जिसका जंगलराज है यूपी में। भट्टा-पारसौल का उदाहरण मेरे सामने है। अगर मैं और मेरी पार्टी के लोग समय से इस गाँव का दौरा नहीं किए होते; अपनी बात को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के समक्ष नहीं रखते, तो शायद ही वहाँ घटित पुलिसिया जुल्म का भयावह चेहरा सामने आ पाता। शायद ही बड़े पैमाने पर लोगों के मारे जाने तथा ग्रामीण औरतों के साथ हुए दुर्व्यवहार की ख़बर प्रकट हो पाती।

बिहार में भले ही कांग्रेस को जनता ने वोट नहीं दिया हो लेकिन वहाँ की जनता ने कांग्रेस को नकारा नहीं है। कांग्रेस की साख आज भी बिहार में बेजोड़ है। अगली विधानसभा चुनाव में जनता हिसाब बराबर कर देगी। नितिश सरकार का कथित विकास का प्रोपोगेण्डा फेल होगा और प्रांतीय सत्ता में कांग्रेस बहुमत से काबिज होगी। बिहार में चल रहे भाजपा-जद(यू) गठबंधन को केन्द्र ने करोड़ों-करोड़ रुपयों का फंड भेजा है। नितिश सरकार अपने ग़िरबान में नहीं झाँकती है। विकास कार्य करने में वह खुद अक्षम है। ये पार्टियाँ अपने भीतर की बुराइयों से नहीं निपटना चाहती हैं। उल्टे कांग्रेस के ऊपर धावा बोलती हैं। यह जानते हुए कि कांग्रेस पार्टी देश की सबसे पुरानी पार्टी है। स्वाधीनता संग्राम में उसकी प्राथमिक भूमिका रही है। आजादी मिलने के बाद देश को औद्योगिक क्रांति, हरित क्रांति, श्वेत क्रांति से होते हुए संचार क्रांति के द्वार तक पहुँचाने वाली पार्टी कांग्रेस ही है। गौरवशाली परम्परा वाली इस पार्टी पर जनता को आज भी सबसे अधिक भरोसा है। मनमोहन सिंह जैसे ईमानदार छवि वाले नेता अन्य पार्टियों में शायद ही हों। भाजपा भी पाक-साफ नहीं है। बसपा, सपा, राजद, लोजपा, जद(यू) और वामदल कांग्रेस पार्टी से प्रतिस्पर्धा अवश्य करते हैं; लेकिन जनता हमारे साफ-सुथरी छवि के सादगीपसंद नेताओं को ही लायक समझती है।

तमाम आलोचनाओं, आरोपों और छींटाकशी के बावजूद कांग्रेस का कोई जोड़ नहीं है। आप ही सोचिए, गरीबों, मजदूरों, किसानों की पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अगर सही नहीं होती, तो जनता मुर्ख नहीं है जो उसे जनादेश सौंपती। उसके किए को सराहती और दुबारा-तिबारा संसद में पहुँचाने खातिर पूर्ण बहुमत प्रदान करती। भाइयों, यूपी विधानसभा चुनाव में अगली बारी कांग्रेसियों की है। हमारी पार्टी को प्रचार की जरूरत नहीं है। हमें खुशी है कि प्रांतीय मोर्चा संभालने वाली प्रखर वक्ता और बुद्धिजीवी नेता रीता बहुगुणा जोशी जी हमारे साथ है। जनता उनकी आत्मीयता भरे मुसकान की कायल है। वे जमीन से जुड़ी हुई नेता हैं। उनके नेतृत्व में मिशन-2012 में कांग्रेस का प्रदेश की सत्ता पर सौ-फीसदी काबिज़ होना तय है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि कांग्रेस ने जो भी काम किए हैं; सब के सब जमीन से जुड़े हैं। कांग्रेस पार्टी में जनता की अगाध निष्ठा है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी आमआदमी की पार्टी है। उनके दुख-दर्द में हमेशा साथ रहने वाली पार्टी है।

जिस दिन योगगुरु रामदेव ने दिल्ली में कुहराम मचाया मैं हतप्रभ रह गया। एक सामान्य मसले को जिस ढंग से गंभीर और भीषण मामला बनाने की षड़यंत्र रची गई। जनता की पार्टी को बदनाम करने की साजिश हुई। काले धन को ले कर भगवा पोशाक वालों ने ऐसा बवेला मचाया कि दिल्ली के सभ्य जनता को भारी कोफ्त हुई। जिस देश की राजधानी में सबकुछ शांतिपूर्ण तरीके से होता है। लोग रोजमर्रा की जिन्दगी में सुकून की सांसे लेते हैं। उस वातावरण को बाबा रामदेव के भीड़बाजों ने विषाक्त कर दिया। मेहनतकश दिल्लीवासियों की नींद हराम कर दी। यह तो अच्छा हुआ कि ‘हेल्दी दिल्ली’ का स्वप्न देखने वाली दिल्ली सरकार ने समय रहते ठोस कार्रवाई की। नौटंकीबाज बाबा रामदेव को रामलीला मैदान से बाहर निकाल फेंका। कई दिनों तक बाबा के ‘मीडिया सेटरों’ ने कांग्रेस पार्टी को लक्ष्य कर दिन-दिन भर जनभावना भड़काने वाले कथा बाँचें। इलेक्ट्रानिक माध्यम पर भौंडे ढंग से दिल्ली पुलिस की छवि खराब करने वाली ख़बरें प्रकाशित की जो कि अपने दायरे में एकदम सही और उपयुक्त कार्रवाई करने का ज़ज़्बा दिखाया है।

इस पूरे घटनाक्रम में देश बिल्कुल शांत रहा। कहीं कोई जुलूस-प्रदर्शन नहीं हुए। जनता में जनाक्रोश भी नहीं दिखा। दरअसल, विपक्षी पार्टियाँ कांग्रेस की सफेदी से डरती है। वे जानती हैं कि काला धन जैसा कोई मामला ही नहीं है। जिन लोगों के पैसे स्विस बैंकों में जमा है; उसकी छानबीन जारी है। कांग्रेस अगर भ्रष्ट होती, तो सुरेश कलमाड़ी, ए. राजा और कनिमोझी जैसे भ्रष्टाचार का आरोप झेलते लोगों को जेल के सलाखों के पीछे नहीं डालती। कांग्रेस देश में बेहतर कल का निर्माण करना चाहती है। हर व्यक्ति को रोजगार देने को दृढ़संकल्प है। भूख, गरीबी, बीमारी, अकाल, सूखा, बाढ़, महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह ठोस प्रयास करने में जुटी है। ऐसी नेकनाम पार्टी को बदनाम करने पर तुली पार्टियों को जनता अवश्य सबक सिखाएगी। यह निश्चित है।

भाइयों, दिल्ली पुलिस की बहादुरी को दाद देनी होगी जिसने चंद घंटों में रामलीला मैदान से उन अराजक तत्त्वों को बाहर खदेड़ दिया जिसका लीडर खुले मंच से सशस्त्र सेना बनाने की बात करता है। कांग्रेस पार्टी ऐसी नहीं है। वह नीड़ का निर्माण करना चाहती है। सभी वर्ग के लोगों का उत्थान। कांग्रेस जाति तोड़ो अभियान का समर्थक है। धर्म और संप्रदाय के नाम पर फसाद करने वाली पार्टी नहीं है कांग्रेस। हिन्दुस्तान की जनता को मालूम है कि बाकी पार्टियाँ झूठी हैं, मक्कार और लंपट है। इसीलिए कांग्रेस ही सत्ता का स्थायी हकदार है। कांग्रेस देसी जनसमर्थन वाली पार्टी है। इसके प्रायोजक पूँजीपति नहीं है। औधोगिक घरानों से चंदा-उगाही करना इस पार्टी को नहीं आता है। तभी तो, कांग्रेस अपने देश की जनपक्षधर हाथों पर भरोसा करते हुए शासन-व्यवस्था में बनी रहती है। यह छुपा तथ्य नहीं है कि कांग्रेस में नाजायज़ पैसों की आमद-आवक शून्य है। अधिकांश सांसद जमीनी सरोकार से जुड़े जमीनी लोग हैं। उनकी अर्जित संपति जनता का विश्वास है। हमारी पार्टी जनता के बीच काम करते हुए दिखना चाहती है। वह करोड़पति सांसदों से लदी-फदी पार्टी नहीं है। कांग्रेस महात्मा गाँधी की संतान है जिनका फ़लसफ़ा था-‘सादा जीवन, उच्च विचार।’ हम नाजायज ढंग से बटोरे गए सम्पति के खिलाफ हैं। ऐय्याशी हमारा जन-धर्म नहीं है। कांग्रेस पार्टी का एजेण्डा वैचारिक स्तर पर खुला है। हम ‘गाँधी जी के जंतर’ को ध्येय-वाक्य समझते हैं।

वहीं अन्य पार्टियों को देखिए, वे तो इसी में आकंठ डूबी हैं। उनका एक ही मकसद; येन-केन-प्रकारेण पैसा बनाना है। चाहे देश जाए जहन्नुम में। जबकि कांग्रेस हिन्दुस्तान को जन्नत बनाने का स्वप्न देखती है। जहाँ-जहाँ केन्द्र-प्रान्त का कांग्रेसी सह-अस्तित्व है; वहाँ विकास और समृद्धि का रौनक देख लीजिए। अंतर से साफ पता चल जाएगा कि कांग्रेस हिन्दुस्तान का सूरत बदलने में कितने जोर-शोर से जुटी है। कांग्रेस पार्टी चाहती है कि भारतीय राजनीति में कम लोग रहे, लेकिन अच्छे लोग रहें। सच्चे और ईमानदार लोग रहें। समझदार और युवा लोग रहंे। दरअसल, कांग्रेस समता की मूरत है। भाईचारा और बंधुत्व उसके रग-रग में प्रवाहित हैं। कांग्रेस शुरू से गंगा-यमुना तहजीब की हिमायती है। गरीबों पर जुल्म ढाने की हिमाकत देश की सभी छोटी-बड़ी पार्टियाँ करती हैं; अपवाद सिर्फ एक कांग्रेस है। कांग्रेसी कार्यकर्ता की ईमानदारी देख लोग दंग रह जाते हैं। आज भी सादगी इन पार्टी कैडरों के आचरण में कूट-कूट कर भरी है। लोग अपनापन के लहजे में कांग्रेस से अपने निकट सम्बन्धों का हवाला देते हैं। कांग्रेस इकलौती ऐसी पार्टी है जिसके आलाकमान से 10-जनपथ में मिलना आसान है। सोनिया जी त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। वे धैर्य से लोगों की पीड़ा और व्यथा सुनती हैं। उनके लिए तत्काल उपाय करती हैं। पिछले कई वर्षों से मनमोहन सिंह पर आरोप-दर-आरोप लगते रहे हैं। जबकि उन्होंने आज देश को क्या नहीं दिया है?

हम अपने शहर में मॉल और मल्टीप्लेक्स देख रहे हैं। सड़कों का नवीनीकरण और चौड़ीकरण होते देख रहे हैं। विद्युत की निरंतरता बनी हुई है सो अलग। अब गाँव के लोग भी टेलीविजन पर ‘वर्ल्ड कप’ और ‘आईपीएल’ देख रहे हैं। उनके लिए नरेगा-मनरेगा जैसे विकल्प हैं जो उन्हें किसी कीमत पर भूखों नहीं मरने दे सकते हैं। बच्चों की मुफ्त शिक्षा के अतिरिक्त उत्तम खाने का प्रबंध है। स्त्रियों में जागृति के लिए कांग्रेस ने कई दिलचस्प कार्यक्रम शुरू किए हैं। पंचवर्षीय योजनाओं में भारत हमेशा लक्ष्य के करीब पहुँचने में सफल रहा है। कांग्रेस सादगीपसंद राजनीतिज्ञों को टिकट देता है. गुंडा, मवाली, अपराधी और हत्या के आरोपी कांग्रेसी दल में शामिल नहीं है। तमाम राजनीतिक उठापटक के बावजूद जनता कांग्रेस को ही चुनेगी। काला धन के मसले पर हवाई किला बाँधने वाली भाजपा और बसपा जैसी पार्टियों ने हमारे देश की धन-संपदा को बड़ी बेदर्दी से लूटा है। इन पार्टियों ने जल-जंगल और जमीन को विदेशी बाज़ार के हवाले कर दिया है। देश को गुलाम बनाने की संस्कृति भाजपा और बसपा ने ही सिरजा है। सपा भी सार्गिद है, लेकिन उसकी हैसियत उस जोड़ की नहीं है कि वह चुनावों में कोई मजबूत तोड़ पैदा कर सके। ऐसे में कांग्रेस ही इन साम्प्रदायिक ताकतों और बुर्जुआ पार्टियों के मुख़ालफत में सही विकल्प हो सकती है। कांग्रेस को यदि देश के अल्पसंख्यक बिन मांगे वोट देते हैं, तो सिर्फ इन वजहों से कि कांग्रेस अपनी विचारधारा में सर्वाधिक निरपेक्ष और दृष्टिसम्पन्न पार्टी है.

अतः बाबा रामदेव के खिलाफ की गई कार्रवाई सही है। मैं चुप था, क्योंकि देश की जनता जान रही थी कि यह सारा मामला प्रायोजित है। बाबा रामदेव के अनुयायियों के माध्यम से देश की सबसे विश्वसनीय पार्टी को बदनाम करने की साजिश है। यह वह तरीका है जिससे देश में हो रहे अच्छे कामों से ध्यान भटकाया जा सके। जनता के भीतर फैल रहे संतोष और प्रसन्नता को झुठलाया जा सके। लेकिन यह कहने की बात नहीं है कि देश की जनता कांग्रेस को छोड़कर किसी दूसरे पार्टी के बारे में बात करना तो दूर कल्पना भी नहीं करती है। कांग्रेस को यह भली-भाँति पता है कि जिस तरह रामलीला मैदान में दिल्ली पुलिस ने बाबा रामदेव को उनकी औकात बता दी है; वैसे ही अगर जनता चाह गई तो कांग्रेस किला भी ढूह में बदल जाएगी। लेकिन ऐसा जनता करना क्यों चाहेगी? यह प्रश्न अतिमहत्त्वपूर्ण है।’’
(राजीव रंजन प्रसाद)
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Things to do after u install Ubuntu

1. First thing first:
 To temporarily configure an IP address, you can use the ifconfig command in the following manner. Just modify the IP address and subnet mask to match your network requirements:

sudo ifconfig eth0 10.0.0.100 netmask 255.255.255.0

To configure a default gateway, you can use the route command in the following manner. Modify the default gateway address to match your network requirements:
 
sudo route add default gw 10.0.0.1 eth0

To verify your IP address configuration of eth0, and default gateway configuration, you can use the ifconfig and route command respectively in the following manner:
ifconfig eth0
route -n

If you require DNS for your temporary network configuration, you can add DNS server IP addresses in the file /etc/resolv.conf. The example below shows how to enter two DNS servers to /etc/resolv.conf, which should be changed to servers appropriate for your network. A more lengthy description of DNS client configuration is in a following section

nameserver 8.8.8.8
nameserver 8.8.4.4

If you no longer need this configuration and wish to purge all IP configuration from an interface, you can use the ip command with the flush option as shown below
ip addr flush eth0

To configure your server to use DHCP for dynamic address assignment, add the dhcp method to the inet address family statement for the appropriate interface in the file /etc/network/interfaces. The example below assumes you are configuring your first Ethernet interface identified as eth0
auto eth0
iface eth0 inet dhcp

By adding an interface configuration as shown above, you can manually enable the interface through the ifup command which initiates the DHCP process via dhclient.
sudo ifup eth0

To manually disable the interface, you can use the ifdown command, which in turn will initiate the DHCP release process and shut down the interface
sudo ifdown eth0


To configure your system to use a static IP address assignment, add the static method to the inet address family statement for the appropriate interface in the file /etc/network/interfaces. The example below assumes you are configuring your first Ethernet interface identified as eth0. Change the address, netmask, and gateway values to meet the requirements of your network.
auto eth0
iface eth0 inet static
address 10.0.0.100
netmask 255.255.255.0
gateway 10.0.0.1

By adding an interface configuration as shown above, you can manually enable the interface through the ifup command.
sudo ifup eth0

To manually disable the interface, you can use the ifdown command.
sudo ifdown eth0

Loopback Interface

The loopback interface is identified by the system as lo and has a default IP address of 127.0.0.1. It can be viewed using the ifconfig command.
ifconfig lo
lo        Link encap:Local Loopback  
          inet addr:127.0.0.1  Mask:255.0.0.0
          inet6 addr: ::1/128 Scope:Host
          UP LOOPBACK RUNNING  MTU:16436  Metric:1
          RX packets:2718 errors:0 dropped:0 overruns:0 frame:0
          TX packets:2718 errors:0 dropped:0 overruns:0 carrier:0
          collisions:0 txqueuelen:0 
          RX bytes:183308 (183.3 KB)  TX bytes:183308 (183.3 KB)
By default, there should be two lines in /etc/network/interfaces responsible for automatically configuring your loopback interface. It is recommended that you keep the default settings unless you have a specific purpose for changing them. An example of the two default lines are shown below.
auto lo
iface lo inet loopback

2. To update and upgrade:
sudo gedit /etc/apt/apt.conf/
In the same file, write some lines as following:
Acquire::http::Proxy "http://usrname:password@x.x.x.x:80";
then save it and close, go for update the system list:
   sudo apt-get update

3. sudo apt-get install ubuntu-restricted-extras
    sudo apt-get install default-jre

4. sudo apt-get install appname --fix-missing

flash player, Gnash (Linux alternative for shockwave) skype, vlc, mplayer, gimp, cheese, miro, okular, remmina, flareGet download manager, rar,
sudo apt-get install browser-plugin-gnash
One can get the flash player from: http://archive.canonical.com/pool/partner/a/adobe-flashplugin/

5. install file foo
   sudo dpkg -i foo.deb

If there is any dependency issues, fix them by:
sudo apt-get install -f

6. sudo apt-get install texlive

   sudo apt-get install kile

 
7. list installed packages
   dpkg -l

8. To upgrade individual software called foo type command:
    sudo apt-get install foo

9. search available packages for foo
   apt-cache search foo

10. remove package foo
    sudo apt-get remove foo
or
   sudo dpkg --force-all -r foo


11. Check if u have a 32/64 bit Ubuntu
      uname -a

12. To copy and paste
   sudo cp -a /path/to/folderWITHOUTASLASHATTHEEND! /where/you/want/folder/to/go

13. Modify the grub2
https://help.ubuntu.com/8.04/switching/dualboot-custom.html

14. Grub2 Tutorial:
      http://www.dedoimedo.com/computers/grub-2.html

15. Install CD/DVD burner: GnomeBaker
      https://help.ubuntu.com/community/GnomeBaker

16. Install HP printer:
      http://hplipopensource.com/hplip-web/index.html

17. Install from .tar.gz file:

tar -xzf archive-name.tar.gz
cd archive-name
./configure
make
sudo make install

18. Upgrade to the new version

Make sure your current version isn't too old to upgrade through packages. If it IS too old (for example, if you're using a non-LTS version that is a couple years old, then you'll need to grab an ISO and upgrade via CD/DVD. Best to not do this over SSH in case something goes wrong, but the upgrade process will open a non-standard SSH port for you (it alerts you to this) if you don't want to be or can't be by the machine.
Step by step:
Update and upgrade your apt-get modules:
sudo apt-get update
sudo apt-get upgrade
sudo apt-get dist-upgrade

Then begin the upgrade process:
sudo apt-get install update-manager-core
sudo do-release-upgrade

In case upgrade is getting cancelled and the current version is quite old then you might need to follow:
http://askubuntu.com/questions/501976/unable-to-upgrade-from-13-04-to-14-04

Also: https://repogen.simplylinux.ch/ 

https://myotragusbalearicus.wordpress.com/2014/12/02/ubuntu-recovery-mode-with-network-and-read-write-filesystem/

*Lubuntu/Documentation/UpgradeToLubuntu: Click here

19. Get rid of “Sorry, Ubuntu 13.10 has experienced internal error”
Its a legacy now. It started with Ubuntu 12.04 and continue till date. Though totally harmless, this crash report is extremely annoying. You can disable the apport by editing the following file:
gksu gedit /etc/default/apport
Now, in this file look for the line
# sudo service apport start force_start=1 enabled=1
Change the enabled=1 to enabled=0. For more detail steps, follow this article on how to get rid of the error permanently.

20. Alternatives:
Octave is for MATLAB

21. Ubuntu Server
http://www.htpcbeginner.com/lightweight-desktop-environment-for-ubuntu-server/

http://www.ubuntugeek.com/how-to-install-gui-on-ubuntu-12-04-precise-server.html

22. You can add a PPA location with the command
sudo add-apt-repository ppa:
For example sudo add-apt-repository ppa:gnome-desktop 
add-apt-repository 'deb http://packages.linuxmint.com/ julia main' 

23. Printers
to view outstanding print jobs:
lpstat -o
to cancel ALL jobs:
cancel -a {printer}

24. "lscpu" gives the info about CPU.



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